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आयुष्मान खुराना का कोरोना के बाद बच्चों का विशेष ध्यान रखने की जरूरत पर जोर, कहा- अगली पीढ़ी की सुरक्षा जरूरी

यूथ आइकन और बॉलीवुड स्टार आयुष्मान खुराना एक विचारशील लीडर हैं. जो अपने प्रगतिशील और महत्वपूर्ण विषयों को उठाने वाले मनोरंजन के साथ समाज में रचनात्मक, सकारात्मक बदलाव लाने का लक्ष्य रखते हैं. TIME मैगज़ीन द्वारा दुनिया के सबसे प्रभावशाली लोगों में से एक के रूप में चुने जाने वाले आयुष्मान को हाल ही में UNICEF के वैश्विक अभियान EVAC (बच्चों के खिलाफ हिंसा को समाप्त करना) के लिए सेलिब्रिटी एडवोकेट के रूप में चुना गया है.

विश्व बाल दिवस को बाल अधिकार दिवस के रूप में भी जाना जाता है, आयुष्मान ने बताया कि महामारी के दौरान का स्वास्थ्य संकट अब एक गंभीर मानवीय और बाल अधिकार संकट में परिवर्तित हो गया है. आयुष्मान ने बाल अधिकारों की रक्षा के लिए निरन्तर कार्य करने का संकल्प लिया. उन्होंने कहा, “हमने देखा है कि स्वास्थ्य संकट के रूप में शुरू हुई महामारी अब एक गंभीर मानवीय और बाल अधिकारों के लिए चुनौती में परिवर्तित हो गई है.

बच्चे प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप में, कई तरह से प्रभावित होते हैं, जैसे कि उनके शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य पर असर, सीखने की क्षमता, सामाजिक संपर्क में कमी, पोषण से वंचित होना आदि. कई बच्चों ने अपने माता-पिता को भी खो दिया. हमारे बच्चे न सिर्फ एक भावनात्मक त्रासदी का ही सामना कर रहे हैं, साथ ही वे उपेक्षा, दुर्व्यवहार और शोषण के उच्च जोखिम में भी हैं.‘‘

उन्होंने आगे कहा, “आइए इस विश्व बाल दिवस पर महामारी के कारण प्रभावित हुए सभी बच्चों को उनके बचपन और भविष्य को वापस लौटाने का संकल्प लें. कोविड-19 ने हममें से कई लोगों के जीने और काम करने के तरीके को बदल दिया है. आइए, पुनः विचार करें और ऐसे कदम उठाएं जिससे सभी बच्चे हर तरह के दुर्व्यवहार से बचे रहें; ताकि वे वापस स्कूल जाकर सीख सकें तथा मानसिक और शारीरिक रूप से स्वस्थ रहें.‘‘

पिछले एक साल से अधिक समय से EVAC सेलिब्रिटी एडवोकेट होने के नाते, आयुष्मान के पास इस विषय पर कुछ सुझाव हैं. वे कहते हैं, ‘‘UNICEF हर जगह, प्रत्येक बच्चे के अधिकारों की वकालत करता है. ये सभी अधिकार आपस में जुड़े हुए हैं – उदाहरण के लिए, जब बच्चे स्वस्थ होंगे तभी वे नियमित रूप से स्कूल जा सकते हैं. और जब बच्चा स्कूल जाएगा, तभी वह बाल श्रम या बाल विवाह से बच पाएगा. वे अविभाज्य भी हैं: एक बच्चे के लिए केवल शिक्षा का अधिकार पर्याप्त नहीं है जबकि उसके पास सुरक्षा का अधिकार नहीं हो या सुविधाओं तक पहुंच हो लेकिन पोषण तक नहीं.”

वर्सेटाइल स्टार आगे कहते हैं, “बाल अधिकारों पर कन्वेंशन, जो इन अधिकारों को निर्धारित करता है, इस दिन 1989 में संयुक्त राष्ट्र महासभा द्वारा अपनाया गया था, जिसे हम विश्व बाल दिवस के रूप में मनाते हैं. हम कई मोर्चों पर प्रगति देख पा रहे हैं, लेकिन हम जानते हैं कि कई बच्चे अभी भी अपने अधिकारों से वंचित हैं. हमें यह बदलाव लाने के लिए जागरूकता पैदा करने और लोगों के दिल और दिमाग तक पहुंचने की आवश्यकता है.‘‘

उन्होंने आगे कहा, ‘‘UNICEF सेलिब्रिटी एडवोकेट के रूप में, मैं बाल अधिकारों पर जागरूकता पैदा करने हेतु पहुंच बढ़ाने के लिए अपने हर संभव प्रयास को निरन्तर जारी रखना चाहता हूं, जिससे प्रत्येक बच्चा; लड़की या लड़का, चाहे वह किसी भी जाति, सामाजिक पृष्ठभूमि या आर्थिक स्तर का हो, उसे अपने अधिकार मिल सकें. क्योंकि यह उनका अधिकार है.‘‘

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