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सुशांत सिंह मामला: ईडी दफ्तर पहुंचे निर्देशक रूमी जाफरी, होगी पूछताछ

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नई दिल्ली : दिवंगत बॉलीवुड अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत केस की जांच को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को अपना अहम फैसला सुना दिया है. सुशांत सिंह केस की जांच मुंबई पुलिस नहीं, बल्कि सीबीआई ही करेगी.  अब सुशांत सिंह केस की जांच सीबीआई करेगी. गुरुवार को सुशांत सिंह राजपूत से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में फिल्म निर्देशक रूमी जाफरी मुंबई स्थित ईडी दफ्तर पहुंचे हैं. उन्हें ईडी ने पूछताछ के लिए समन भेजा था.

बता दें कि एक्टर सुशांत सिंह राजपूत की मौत के मामले में मनी लॉन्ड्रिंग केस लेकर ईडी ने जाफरी को समन भेजा था. गौरतलब है कि सुशांत सिंह राजपूत के पिता कृष्ण किशोर सिंह ने पटना में दर्ज कराई गई इस प्राथमिकी में रिया चक्रवर्ती और उनके परिवार के सदस्यों सहित छह व्यक्तियों पर अपने पुत्र को आत्महत्या के लिये मजबूर करने सहित कई गंभीर आरोप लगाये हैं.

अनिल देशमुख के इस्तीफा की मांग

वहीं दूसरी तरफ फिल्म अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की कथित आत्महत्या के मामले की जांच सीबीआई से कराने के सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद बिहार भाजपा ने महाराष्ट्र के गृहमंत्री अनिल देशमुख के इस्तीफा की मांग करते हुए कहा कि शिवसेना, कांग्रेस और राकंपा माफी मांगे.

बिहार भाजपा प्रवक्ता डॉ. निखिल आनंद ने गुरुवार को कहा कि महाराष्ट्र के गृहमंत्री अनिल देशमुख को भारत की न्यायपालिका और संघीय व्यवस्था का अपमान करने के लिए नैतिक तौर पर अविलंब इस्तीफा देना चाहिए क्योंकि 66 दिनों तक सुशांत मामले को भ्रमित करने वाली महाराष्ट्र सरकार और मुम्बई पुलिस बुरी तरह ‘एक्सपोज’ हो गई है.

उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे भी अपनी सरकार की तरफ से सार्वजनिक माफी मांगे. उन्होंने कहा, शिवसेना के न्याय विरोधी कृत्य का हिस्सा बनने के लिए कांग्रेस और राकंपा के सभी शीर्ष नेताओं को भी माफी मांगनी चाहिए. महाराष्ट्र सरकार और उसकी सभी गठबंधन दलों नें सुशांत मामले को भटकाने के लिए राजनीतिक रंग देने का घटिया प्रयास किया. इससे स्पष्ट है कि शिवसेना, कांग्रेस, राकंपा बॉलीवुड के ‘बेबी-बाबा-माफिया’ गिरोह के संरक्षक बन गए हैं.

आनंद ने कहा कि शिवसेना, कांग्रेस, राकंपा के आधिकारिक विरोध के कारण सुशांत मामले में महाराष्ट्र सरकार और मुम्बई पुलिस का न्याय विरोधी रूख सुप्रीम कोर्ट तक भी बरकरार रहा. उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद महाराष्ट्र सरकार और मुम्बई पुलिस का मुखौटे वाला चाल-चरित्र-चेहरा बेनकाब हो गया है. महाराष्ट्र सरकार और मुम्बई पुलिस द्वारा अहम गवाहों को धमकाने, सबूतों को मिटाने और तथ्यों से छेड़छाड़ करने की सार्वजनिक चर्चा हम सभी के लिए बड़ी चिंता है.

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