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सकारात्मकता से ही जीतेंगे कोरोना व उसके बुरे प्रभावों से जंग

मृत्युंजय दीक्षित

वर्तमान कोरोना काल भारत के लिए ही नहीं अपितु पूरे विश्व के लिए एक बहुत कठिन समय लेकर आया है। इस कालखंड में हम सभी ने अपने बहुत सारे प्रियजनों, समाज व देश की बड़ी हस्तियों को खो दिया है। चारों तरफ निराशा, चिंता, तनाव व मानसिक अशांति के कारण बहुत सारी समस्याओं का जन्म हो रहा है। कोरोना काल में बहुत से लोग बेरोजगार हो गये हैं जिसके कारण युवाओं को अपने भविष्य की चिंता सता रही है। जो लोग इस समय अपनी नौकरी कर रहे हैं उन्हें अपनी नौकरी बचाने की भी चिंता सता रही है। कोरोनारूपी यह जो आपदा आयी है इसके कारण सब कुछ बुरा ही हो रहा है, ऐसा नहीं है।
कोरोना काल में जहां एक ओर लोग कालाबाजारी व जमाखोरी कर रहे हैं। वहीं समाज व देश में सकारात्मक वातावरण पैदा करने के लिए समाज की हस्तियां आगे आ रही हैं। आज समाज में जिस प्रकार से नकारात्मकता की भावना गहरी होती जा रही है उसे समाप्त करने के लिए समाज को जगाने के लिए तथा उसे आगे बढ़ाने के लिए समाज की जानी मान हस्तियों ने “हम जीतेंगे – पॉजिटिविटी अनलिमिटेड” नामक एक श्रृंखला का आयोजन किया था। यह एक बहुत ही अच्छा व सराहनीय कदम था समाज में सकारात्मकता फैलाने के लिए लेकिन मीडिया के एक तथाकथित वर्ग ने इस पवित्र आयोजन को भी राजनैतिक रंग में रंगने का असफल प्रयास कर दिया और कहा कि यह आयोजन संघ की ओर से मोदी सरकार की बिगड़ रही छवि को ठीक करने के लिए किया जा रहा है। जबकि वास्तविकता यह है कि पॉजिटिविटी अनलिमिटेड श्रृंखला का आयोजन पूरी तरह से गैर राजनैतिक था और जनमानस में सकारात्मकता का भाव पैदा करने के लिए था।
कोरोना काल में जहां एक ओर लोग कालाबाजारी व जमाखोरी कर रहे हैं। वहीं समाज व देश में सकारात्मक वातावरण पैदा करने के लिए समाज की हस्तियां आगे आ रही हैं। आज समाज में जिस प्रकार से नकारात्मकता की भावना गहरी होती जा रही है उसे समाप्त करने के लिए समाज को जगाने के लिए तथा उसे आगे बढ़ाने के लिए समाज की जानी मान हस्तियों ने “हम जीतेंगे – पॉजिटिविटी अनलिमिटेड” नामक एक श्रृंखला का आयोजन किया था। यह एक बहुत ही अच्छा व सराहनीय कदम था समाज में सकारात्मकता फैलाने के लिए लेकिन मीडिया के एक तथाकथित वर्ग ने इस पवित्र आयोजन को भी राजनैतिक रंग में रंगने का असफल प्रयास कर दिया और कहा कि यह आयोजन संघ की ओर से मोदी सरकार की बिगड़ रही छवि को ठीक करने के लिए किया जा रहा है। जबकि वास्तविकता यह है कि पॉजिटिविटी अनलिमिटेड श्रृंखला का आयोजन पूरी तरह से गैर राजनैतिक था और जनमानस में सकारात्मकता का भाव पैदा करने के लिए था।
कोरोना कालखंड में यह पता चल रहा है कि योग, आयुर्वेद, ध्यान, प्राणायाम और षंखध्वनि आदि से बहुत लोग स्वस्थ हो रहे हैं। योग की आज महत्ता बढ़ गयी है। यह हमारी सनातन संस्कृति का एक बहुत बड़ा सकारात्मक पक्ष है जिसे समाज में और अधिक गति से सामने लाने की आवश्यकता है। युद्ध के समय हमें खुद को तैयार करना चाहिए। दिन में करीब 30 मिनट स्वयं की रोग प्रतिरोधक क्षमता के विकास के लिए व्यायाम को देना चाहिए। जिसमें सबसे अधिक उपयुक्त प्राणायाम की सभी विधाओं को अपनाना चाहिए। महामारी एक संकट है जिसे भारत जैसे बड़े देश में सीमित संसाधनों के साथ नियंत्रण में लाने की कोशिश की जा रही है। इस समय हम सभी को जागरूकता फैलानी चाहिए । अफवाहें फैलाने , भ्रम और दोषारोपण की राजनीति से बचना चाहिए।
भारतीय समाज में वर्तमान चुनौती सहित किसी भी चुनौती का सामना कर उस पर विजय प्राप्त करने की क्षमता है। यह बीमारी तन की बीमारी है मन की नहीं। यह समय अपने मन को अच्छा रखने का है। यदि मन अच्छा रहता है तो अधिकांश बीमारियां स्वयं ठीक हो जाती हैं जबकि कुछ लोगों को पता ही नहीं चलता कि वह बीमार हैं या फिर उन्हेें किसी प्रकार की बीमारी आयी है और अगर आयी है तो वह कब समाप्त हो गयी उन्हें पता ही नहीं चलता। पाजिविटी श्रृंखला में यह बात सामने आयी कि वर्तमान समय में निर्बल के राम पर हमारे विश्वास की परीक्षा है। हमें इस समय धैर्य और जोश के साथ करूणा का भाव जगाते हुए सेवा कार्य करना चाहिए। वर्तमान समय परीक्षा का है और हमें ईश्वर को याद करना चाहिए। वर्तमान समय अपने अंदर धैर्य जगाने का है।

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