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न ढाेल,न हजाराे की भीड़,मूर्ति विसर्जन में सिर्फ मास्क व साेशल डिस्टेसिंग

पीलीभीत/ कोविड-19 के चलते मुंबई ,महाराष्ट्र समेत यूपी के ज्यादातर हिस्सों में इस साल दही हांडी कार्यक्रम नहीं हुए है। जहां ये आयोजित किए गए, वहां सिर्फ सांकेतिक तरीका इस्तेमाल किया गया। यूपी के पीलीभीत मे 2 से 5 तक ही मटकी फोड़ने वाले गोविंदा मौजूद रहे आैर साेशल डिस्टेसिंग का पालना कर मटकी फाेड़कर इस उत्सव काे मनाया है हालाकि पीलीभीत के निवासी गणेश चाैथ का साल भर इंतजार करते हैं। शहर के रामलीला मैदान पर गणेश चतुर्थी मेला का आयोजन भी किया जाता है जाेकि पखवारे भर तक चलता है। हर साल लोगों को इस मेला का शिद्दत से इंतजार रहता है लेकिन महामारी ने इस साल सब बदल दिया।

न ढाेल,न हजाराे की भीड़,मूर्ति विसर्जन में सिर्फ मास्क व साेशल डिस्टेसिंग
बाबा मठिया नाथ मे समस्त गुप्ता परिवार।

काेराेनाकाल का असर बया करती यह तस्वीरे पीलीभीत के बीसलपुर की है मंदिर बाबा मठिया नाथ के व्यवस्थापक राम किशाेर गुप्ता आैर उनके परिवार के सभी लाेग हर साल यह उत्सव धूम धाम से मनाते है लेकिन इस वार काेराेना काल में इनके द्वारा दही हांडी उत्सव का कार्यक्रम मंदिर मे ही हुआ है। जिसमे तरीका बिल्कुल सांकेतिक रहा। न हजारों की भीड़। न ढोल की गूंज और न लाखों रुपए के इनाम। सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करते हुए 5 से 10 इन गोविंदाओं की टोली ने एक और दो मंजिला पिरामिड बनाकर दही मटकी फोड़ी है। ज्यादातर गोविंदाओं ने मास्क पहन रखा था

न ढाेल,न हजाराे की भीड़,मूर्ति विसर्जन में सिर्फ मास्क व साेशल डिस्टेसिंग
साेशल डिस्टेसिंग का पालन कर मूर्ति विसर्जन काे जाते भक्तगण।

इसके साथ ही मूर्ति विसर्जन काे लेकर भी सतर्कता पूरी तरीके से बरती गयी है हालाकि मूर्ति इस बार छाेटी ही रही जिसके विसर्जन के बक्त सिर्फ 5 से 7 लाेग शामिल रहे सभी ने गाइड लाइन का पालन करते हुए मूर्ति विसर्जन का कार्यक्रम किया हालाकि कि उत्सव में शामिल होने से पहले सबकी स्क्रीनिंग की गई थी। आयोजकों ने सैनिटाइजर भी रखा।

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