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बन्दोईया काण्ड की निष्पक्ष विवेचना की लगातार हो रही है मांग।

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अमेठी। मुंशीगंज के बन्दोइया गांव के दलित प्रधानपति की हत्या के मामले में पुलिस ने बेशक नामजद आरोपियों को जेल भेज दिया है, लेकिन उसकी कार्यशैली पर सवाल उठने लगे हैं। नामजद आरोपियों के पक्ष में एक वर्ग खुलकर उनकी बेगुनाही के सबूत दे रहा है तो पुलिस के निष्पक्ष जांच का आश्वासन लोगों के गले नही उतर रहा है। पीड़ित को न्याय दिलाने को मीडिया से जुड़े लोग अब खुलकर सामने आ गए हैं और उच्चस्तरीय जांच के लिये डीएम के माध्यम से राज्यपाल को ज्ञापन भेज रहे हैं। बन्दोइया गांव के दलित प्रधानपति अर्जुन की हत्या के मामले में पुलिस की ओर से की गई ताबड़तोड़ कार्यवाही उसकी ही गले की फांस बन गयी है। जेल भेजे गए नामजद आरोपियों के पक्ष में खुलकर आये मीडिया के लोगों के कुछ अनुत्तरित सवालों के जवाब पर पुलिस ने चुप्पी साध ली है। इस तरह पुलिस का चुप रहना लोगों को अखर रहा है। लोगों का कहना है कि आरोपियों के बेगुनाही के सबूत होने के बावजूद पुलिस का मौन रहना बहुत कुछ बयां कर रहा है। मीडिया के लोग भी पीछे हटने को तैयार नही हैं। उन्हें भी सवालों के जवाब चाहिए। इसीलिए वे भी घटना की निष्पक्ष उच्चस्तरीय जांच की मांग को लेकर राज्यपाल को ज्ञापन भेज रहे हैं। कुछ अनुत्तरित सवालों में घटनास्थल पर लगे सीसीटीवी फुटेज का परीक्षण न करना, मृतक के मोबाइल की लोकेशन, सीडीआर व बीटीएस की जांच न करना शामिल है। मोबाइल के लोकेशन से बहुत कुछ पता किया जा सकता है, मसलन घटनास्थल पर आरोपियों की मौजूदगी के साथ मृतक कितने लोगों से बात की और कहाँ-कहाँ गया। जिस चौराहे से मृतक के अपहरण की कहानी गढ़ी जा रही है वहाँ से अपहरण की पुष्टि न होकर मृतक का अपने साथियों संग जाना बताया जा रहा है। आरोपियों में 16 साल के नाबालिग के साथ उसके पिता भी नामजद हैं। कोई पिता अपने बेटे का भविष्य क्यों बर्बाद करेगा जबकि उनके पास आरोप के मुताबिक पहले से ही तीन और लोग घटनास्थल पर मौजूद हैं। अपने ही अहाते के पीछे घटना कारित कर पुलिस को सूचना देना कौन अपने पैर में कुल्हाड़ी मारना चाहेगा। बहुत कुछ ऐसे अनुत्तरित सवाल जो पुलिस का पीछा नही छोड़ रहे हैं। बताना मुनासिब होगा कि मृतक अर्जुन की पत्नी गांव की प्रधान हैं। गांव के ही एक-दो लोगों पर प्रधान के विकास कार्यों के साथ लेखा-जोखा व लेन-देन का जिम्मा है। वे लोग हमेशा प्रधान के परिवार के साथ साये की तरह छाए रहते हैं। गांव के विकास को आये पैसे में जमकर धांधली हुई है। बड़ी संख्या में गांव के लोग मामले की जांच को लेकर डीएम से शिकायत भी किये हैं। जांच होती कि इससे पहले खुद को फंसता देख, मामले को अलग रंग देने की कोशिश में बड़ी गलती हो गयी। वजह कुछ भी हो सच्चाई तो जांच के बाद ही सामने आएगी जिसके लिए मीडिया के लोगों के साथ ही अन्य लोग भी मुखर हैं।
प्रधानपति की हत्या के मामले में निष्पक्ष व उच्चस्तरीय जांच की मांग को लेकर गुरुवार को प्रेस क्लब तहसील इकाई अमेठी से जुड़े पत्रकारों ने राज्यपाल को सम्बोधित एक ज्ञापन एसडीएम योगेंद्र सिंह को सौंपा। इस मौके पर संजय सिंह, अमित मिश्रा, सूर्य प्रकाश शुक्ल, मनोज पाठक, मधुसूदन मिश्र, आदित्य मिश्र, चंद्रमोहन मिश्र, अंजनी मिश्र, दिलीप यादव, अरुण गुप्ता, उमेश सिंह, अर्जुन शुक्ल, अभिषेक कुमार, अखिलेश तिवारी, आशुतोष तिवारी सहित बड़ी संख्या में पत्रकार मौजूद रहे। प्रेस क्लब के तहसील मुसाफिरखाना के अध्यक्ष विश्वंभर नाथ तिवारी के साथ अकील अहमद, हंसराज सिंह, हर प्रसाद यादव, सुनील, राम मिश्रा, मनोज त्रिपाठी सहित अन्य सदस्यों ने तहसीलदार श्रद्धा सिंह को और तहसील तिलोई में प्रेस क्लब तिलोई के संरक्षक बैजनाथ मिश्र ,अध्यक्ष जितेंद्र मिश्रा, महामंत्री इरशाद अहमद, जय प्रकाश पांडे, जमीर अहमद , नालिनेश श्रीवास्तव, डब्बू शुक्ला ,मोजीम खान, अग्निवेश मिश्रा, पवन मौर्य , नीलू सोनी, वीरेंद्र सिंह,आदि लोगों ने उपजिलाधिकारी महात्मा सिंह को ज्ञापन सौंपा।

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