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UPPSC की परीक्षा में उत्तर प्रदेश में मिला प्रथम स्थान।

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कहा जाता है कि “सपने उन्हीं के पूरा होते हैं जिनके सपनों में जान होती है। पंखों से कुछ नहीं होता है हौसलों से उड़ान होती है।।” कुछ भी करने के लिए दिल में हौसले और जज्बे की जरूरत होती है । जिससे बहुत कुछ हासिल किया जा सकता है। ऐसा ही जज्बा अमेठी जनपद के अमेठी तहसील व थाना क्षेत्र अंतर्गत गांव शुकुलपुर मजरे चतुर्भुजपुर में देखने को मिला। जहां पर एक साधारण परिवार में जन्मे अखिलेन्द्र कुमार मिश्र ने उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग द्वारा आयोजित उच्च शिक्षा विभाग में भूगोल प्रवक्ता के पद पर उत्तर प्रदेश में प्रथम स्थान प्राप्त करके दिखाया है

जी हां आपको बता दें कि अमेठी कोतवाली क्षेत्र के चतुर्भुज पुर शुकुलपुर गांव के रहने वाले स्वर्गीय हर्ष नारायण मिश्र के तीन पुत्रों में सबसे बड़े अखिलेंद्र कुमार मिश्र शुरू से ही होनहार थे। जिनकी प्राथमिक शिक्षा गोसाईगंज प्राइमरी स्कूल में संपन्न हुई उसके बाद हाईस्कूल शिव प्रताप इंटर कॉलेज तथा इंटरमीडिएट श्री रणवीर इंटर कॉलेज अमेठी से अच्छे अंकों में उत्तीर्ण किया । तत्पश्चात स्नातक और परास्नातक अमेठी के ही आरआरपीजी कॉलेज से उत्तीर्ण किया । जिसमें वह स्नातक एवं परास्नातक दोनों में ही गोल्ड मेडलिस्ट रहे । इसके उपरांत B.Ed की डिग्री हासिल कर वर्ष 2009 में अखिलेंद्र का चयन बेसिक शिक्षा विभाग के उच्च प्राथमिक विद्यालय में हो गया। लेकिन सरकारी नौकरी मिलने के बावजूद अपनी पढ़ाई लगातार जारी रखी और वर्ष 2012 में नेट परीक्षा उत्तीर्ण की तथा वर्ष 2014 में पीएचडी की उपाधि से सम्मानित हुए। वर्तमान में सहायक अध्यापक उच्च प्राथमिक विद्यालय अमरपुर संग्रामपुर अमेठी में तैनात थे। तभी उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग प्रयागराज के द्वारा उच्च शिक्षा विभाग में भूगोल प्रवक्ता पद के लिए विज्ञापन निकला। जिसमें उन्होंने अपना आवेदन किया तत्पश्चात परीक्षा हुई जिसमें वह उत्तीर्ण हुए और इंटरव्यू के लिए बुलाया गया इंटरव्यू होने के बाद जब परिणाम घोषित हुआ। तब अखिलेंद्र ही नहीं बल्कि उनके घर परिवार के सभी सदस्य एवं उनके गुरुजन आदि लोगों ने खुद को गौरवान्वित महसूस किया। क्योंकि अखिलेंद्र ने उत्तर प्रदेश में लोक सेवा आयोग द्वारा आयोजित इस परीक्षा में प्रथम स्थान प्राप्त किया था। जिसको लेकर क्षेत्र में खुशी का माहौल है।

अखिलेंद्र की सफलता के बारे में बात की गई तब उन्होंने बताया कि “संकल्प का कोई विकल्प नहीं” हो सकता है । इसलिए आज के युवाओं को दृढ़ संकल्प लेते हुए कठिन परिश्रम करने की आवश्यकता है। जिससे उनको सफलता निश्चित रूप से मिलेगी। अखिलेंद्र ने अपनी सफलता का श्रेय अपने माता पिता का आशीर्वाद तथा परमपिता परमेश्वर की कृपा के साथ-साथ अपने गुरुजनों जिसमें विशेष रूप से डॉक्टर त्रिवेणी सिंह – प्राचार्य, डॉक्टर सत्यकाम आर्य, डॉ अर्जुन पांडेय, डॉक्टर सतीश राय, डॉक्टर अक्षयवर नाथ तिवारी, ज्वलंत कुमार शास्त्री, डॉक्टर लाल साहब सिंह, मनोज चौरसिया, राहुल भदौरिया तथा नागेश सिंह सहित अपने इष्ट मित्रों तथा प्रकृति के कण कण को दिया है।

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