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योगी सरकार ने UPSSF के गठन की जारी की अधिसूचना, बिना वारंट घर की तलाशी लेने और गिरफ्तारी का होगा अधिकार

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लखनऊ। उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने उत्तर प्रदेश विशेष सुरक्षा बल (यूपीएसएसएफ) के गठन की अधिसूचना जारी कर दी है। यूपीएसएसएफ को राज्य में महत्वपूर्ण सरकारी भवनों, कार्यालयों और औद्योगिक प्रतिष्ठानों की सुरक्षा में सुरक्षा प्रदान करने के लिए तैनात किया जाएगा। औद्योगिक प्रतिष्ठानों, प्रमुख स्थलों, हवाई अड्डों, मेट्रो, कोर्ट समेत अन्य स्थानों की सुरक्षा के लिए गठित होने वाले यूपीएसएसएफ के पास बिना वॉरंट तलाशी लेने और गिरफ्तारी करने का भी अधिकार होगा। उत्तर प्रदेश स्पेशल सिक्योरिटी फोर्स के नाम से गठित इस नई फोर्स का नेतृत्व एडीजी स्तर का अधिकारी करेगा।

यूपीएसएसएफ से निजी कंपनियां भी ले सकती हैं सेवाएं

बल का गठन केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (सीआईएसएफ) की तर्ज पर किया जा रहा है, जिन्हें मेट्रो, हवाईअड्डों, औद्योगिक संस्थानों, अदालतों, धार्मिक स्थानों, बैंकों और अन्य वित्तीय संस्थानों जैसे स्थानों पर तैनात किया जाएगा। निजी कंपनियां भी यूपीएसएसएफ से सेवाएं ले सकती हैं, जिसका उन्हें पेमेंट करना होगा।

यूपीएसएसएफ का मुख्यालय लखनऊ में होगा, जिसको एडीजी स्तर के अधिकारी लीड करेंगे। यूपीएसएसएफ में पांच बटालियन होंगे। पिछले साल दिसंबर में अदालत परिसर में हिंसा की घटनाओं के चलते इलाहाबाद उच्च न्यायालय के निर्देश पर एक विशेष बल के गठन का प्रस्ताव रखा गया था।

हमेशा ऑन ड्यूटी रहेगा SSF का हर जवान

बल का प्रत्येक सदस्य हमेशा ऑन ड्यूटी माना जाएगा और उसे प्रदेश में कहीं भी तैनाती दी जा सकती है। इस बल के किसी सदस्य द्वारा ड्यूटी के दौरान किया जाने वाले किसी भी कार्य को लेकर कोर्ट बिना सरकार की मंजूरी के उसके खिलाफ अपराध का संज्ञान नहीं ले पाएगा। यूपी अपर मुख्य सचिव गृह अवनीश अवस्थी ने कहा कि इस विशेष सुरक्षा बल में 9,919 कर्मी होंगे। शुरुआत में इसकी 5 बटालियन होंगी, जिस पर एक साल में 1747 करोड़ रुपये खर्च होगा। पीएसी का इंफ्रास्ट्रक्चर भी इसमें शेयर किया जाएगा।

डीजीपी से मांगा गया रोडमैप

बीते 26 जून को कैबिनेट बाई सर्कुलेशन के जरिए योगी कैबिनेट ने इस फोर्स के गठन की मंजूरी दी गई थी। अपर मुख्य सचिव गृह अवनीश अवस्थी ने बताया कि विशेष सुरक्षा बल गठित करने का आदेश जारी हो गया है। अधिनियम सदन में पारित हुआ था और अब प्रभावी हो गया। इसके स्ट्रक्चर, तैनाती और कामकाज पर डीजीपी से रोडमैप मांगा गया है। उन्होंने कहा, ‘यह मुख्यमंत्री का ड्रीम प्रोजेक्ट है। हाईकोर्ट ने आदेश दिया था कि सिविल कोर्ट में स्पेशल फोर्स की तैनाती की जाए।’

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