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बांदा: कोरोना से पूर्व मंत्री जमुना प्रसाद बोस का निधन

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खास बातें-

  • कोरोना संक्रमित पूर्व मंत्री जमुना प्रसाद बोस का निधन.
  • एक सितंबर को लोहिया अस्पताल लखनऊ में हुए थे भर्ती.
  • बुंदेलखंड के गांधी कहे जाते हैं पूर्व मंत्री जमुना प्रसाद बोस.
  • पूर्व मंत्री के निधन के बाद हर तरफ शोक की लहर.

बांदा: जिले के रहने वाले पूर्व मंत्री जमुना प्रसाद बोस की तबीयत एक सितंबर को खराब हो गई थी. इसके बाद उनका कोरोना टेस्ट कराया गया था, जिसमें वे पॉजिटिव पाए गए थे. उन्हें इलाज के लिए लखनऊ के राम मनोहर लोहिया अस्पताल में भर्ती कराया गया था, लेकिन सोमवार की शाम को इलाज के दौरान उनका निधन हो गया. पूर्व मंत्री के निधन के बाद से ही राजनैतिक गलियारों से लेकर पूरे बुंदेलखंड में शोक की लहर है. पूर्व मंत्री जमुना प्रसाद बोस का मंगवार को कोरोना प्रोटोकॉल के तहत लखनऊ में ही अंतिम संस्कार किया जाएगा.

आप को बता दें कि पूर्व मंत्री जमुना प्रसाद बोस जिले के खिन्नीनाका के रहने वाले थे. बुंदेलखंड में वे बेहद ही ईमानदार नेता के रूप में जाने जाते थे. ईमानदारी को लेकर लोग उनकी मिसाल देते हैं. वे चार बार विधायक और दो बार मंत्री रहे, लेकिन इसके बावजूद भी जमुना प्रसाद बोस के पास अपना घर नहीं था. अभी तक वे किराए की मकान में ही रह रहे थे.

बताया जाता है कि विधायक और मंत्री बनने से पहले इनका बांदा शहर में बना खुद का मकान बहन की शादी में 500 रुपये में बिक गया था, तब से लेकर आज तक यह किराए के मकान में ही रहे थे. आज भी इनका परिवार किराए के मकान में ही रहता है. बताया जाता है कि इन्हें कई बार पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव ने शहर में जमीन देखकर घर बनवा देने की बात कही थी, लेकिन इसके बाद भी उन्होंने मदद नहीं ली.

जमुना प्रसाद बोस 1938 में सुभाष चंद्र बोस त्रिपुरी कांग्रेस के अध्यक्ष चुने गए थे. तभी से जमुना प्रसाद को उनके साथी बोस कहने लगे थे. इसके बाद 1974 में जमुना प्रसाद बोस प्रजा सोशलिस्ट पार्टी से पहली बार बांदा सदर विधानसभा की सीट से विधायक बने. वहीं 1977 में यूपी के ग्राम विकास व पंचायती राज विभाग में मंत्री बने. 1985 में वे फिर से विधायक बने और 1989 में मुलायम सरकार में पशुपालन व मत्स्य मंत्री भी रहे.

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