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अटल बिहारी को पसंद थी लखनऊ की मिठाई, राजधानी से था गहरा नाता

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लखनऊ: भारत के पूर्व प्रधानमंत्री और भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी की दूसरी पुण्यतिथि पर पीएम मोदी ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की. वाजपेयी जब तक लखनऊ के सांसद रहे वह राजधानी में ही रहा करते थे, जब अटल जी प्रधानमंत्री बन गए उसके बाद उनका लखनऊ आना कम हो गया, लेकिन शहर से उनका जुड़ाव कम नहीं हुआ. अटल जी पुराने लखनऊ की राजा ठंडाई के बेहद शौकीन थे. स्वर्गीय वाजपेयी पुराने लखनऊ की कचौड़ी और रसमलाई के साथ नकुल मिठाई के भी दीवाने रहे हैं.

खाने पीने के शौकीन थे पूर्व पीएम अटल बिहारी वाजपेयी

अटल बिहारी वाजपेयी पांच बार सांसद रहे हैं. लखनऊ की फिज़ा में अटल जी का नाम अमर है. यह बात जग जाहिर है कि अटल जी खाने-पीने के बहुत शौकीन थे और लखनऊ से उनके जुड़ाव की वजह यहां का खानपान भी था. अटल बिहारी वाजपेयी को पुराने लखनऊ की ठंडाई बहुत पसंद थी. पुराने लखनऊ के चौक स्तिथ गोल दरवाज़े चौरहे पर मशहूर पंडित राजा की ठंडई अटल बिहारी वाजपेयी की फेवरेट थी.

शौक से पीते थे ठंडई

राजा ठंडाई के मालिक भी इस बात को बताते हैं कि सांसद रहते हुए कई बार अटल जी ने उनके यहां की ठंडाई पी और तारीफ की. वह अपने पिता के साथ अटल बिहारी वाजपेयी के पास ठंडाई लेकर जाया करता थे. अटल बिहारी वाजपेयी प्रधानमंत्री बन गए उसके बाद जब भी वह आते थे तो हमारी कोशिश जरूर रहती थी कि एक बार उन तक ठंडाई पहुंचाई जाए. अगर उनको यह मालूम पड़ जाता था कि हम ठंडाई लेकर उनके दरवाजे के बाहर खड़े हैं तो वह हमें जरूर अंदर बुलाते थे और हमारी ठंडई को शौक से पीते थे.

पुण्यतिथि पर पूरा देश कर रहा याद

चौक स्तिथ राजा ठंडाई की दुकान में अटल जी की पुरानी तस्वीरें आज भी सजी हुई है. इसके अलावा लखनऊ की मिठाइयों के भी अटल बिहारी वाजपेयी बहुत शौकीन थे. अटल बिहारी वाजपेयी को इस दुनिया को अलविदा कहे भले ही 2 वर्ष बीत गए हो, लेकिन यह अटल जी से लोगों की मोहब्बत और वाजपेयी का ज़मीन से जुड़ा होना ही है जो आज उनकी पुण्यतिथि पर पूरा देश उन्हें याद कर रहा है.

जुलूस निकालने में अटल का बड़ा योगदान

मुस्लिम धर्मगुरु मौलाना ख़ालिद रशीद फरंगी महली ने बताया कि अटल जी का लखनऊ में निकलने वाले जुलूसों में बड़ा योगदान रहा है और लंबे वक्त से बंद रहे जुलूसों को अटल जी ने दोनों फिरकों (शिया और सुन्नी) को समझाकर वापस से शुरू कराया था, जिसके बाद से मोहर्रम के जुलूस और सुन्नी समुदाय के जुलूस बेहद अमन और शांति के साथ निकलते चले आ रहे हैं.

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