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सीएए पर पीएम की दो टूक- एक साल में किसी की नागरिकता नहीं गई

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पटना : बिहार विधानसभा चुनाव के लिए तीन नवंबर को दूसरे चरण का मतदान होगा. चुनावी प्रचार के सिलसिले में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज बगहा में अपनी चौथी रैली को संबोधित किया.

बगहा में पीएम मोदी का संबोधन
  • नीतीश कुमार की अगुवाई में बिहार में एनडीए की सरकार ने तेजी से काम किए. युवाओं को बिहार में ही रोजगार मिले ये जरूरी है. ये कौन दिलाएगा? वो जिन्होंने बिहार को अंधेरे और अपराध की पहचान दी, जिनके लिए रोजगार देना करोड़ों की कमाई का माध्यम है या फिर नीतीश के नेतृत्व में एनडीए जिसने बिहार को बीमारू राज्य की श्रेणी से बाहर निकालने का काम किया
  • प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि आत्मनिर्भर बिहार, गांवों में उद्यम के, रोजगार के अवसर तैयार करने का अभियान है. आत्मनिर्भर बिहार, बिहार के गौरव, बिहार के वैभव को फिर से लौटाने का मिशन है. खेती हो, पशुपालन हो, मछलीपालन हो, इससे जुड़े उद्योग और उद्यम आत्मनिर्भर चंपारण, आत्मनिर्भर बिहार का अहम हिस्सा हैं.
  • जंगलराज की हालत ये थी कि जो उद्योग, चीनी मिलें, दशकों से चंपारण और बिहार का हिस्सा रही हैं, वो भी बंद हो गईं. अब तो इस चुनाव में जंगलराज वालों के साथ नक्सलवाद के समर्थक, देश के टुकड़े-टुकड़े करने की चाहत रखने वालों के समर्थक भी बढ़ चढ़कर बारात में जुड़ गए हैं.
  • चंपारण एक प्रकार से भारत की आस्था-आध्यात्म और हमारे सामर्थ्य को परिभाषित करने वाली धरती है.यहां बुद्ध के निशान भी हैं. यहां से भारत के स्वतंत्रता आंदोलन को भी नई दिशा मिली.
  • ये पूज्य बापू के सत्याग्रह की धरती है.आज चंपारण को एक बार फिर वही संकल्प लेना है जो उसने आजादी के समय लिया था. आज फिर चंपारण के लोगों को संकल्प लेना है कि जो भी आत्मनिर्भर बिहार,आत्मनिर्भर भारत के रास्ते में रोड़ा बन रहे हैं, उन्हें लोकतांत्रिक तरीके से सबक सिखाया जाए.
  • चंपारण का, बिहार का ये हिस्सा थारू जनजाति के साथियों के तप, त्याग और तपस्या का प्रतीक है. थारू समुदाय की पीढ़ियों ने जनजाति का दर्जा पाने के लिए लंबा इंतजार किया. ये अटल जी की ही सरकार थी, जिसने थारु समुदाय को जनजाति का दर्जा दिया. चंपारण का, बिहार का ये हिस्सा थारू जनजाति के साथियों के तप, त्याग और तपस्या का प्रतीक है.
  • थारू समुदाय की पीढ़ियों ने जनजाति का दर्जा पाने के लिए लंबा इंतजार किया. ये अटल जी की ही सरकार थी, जिसने थारु समुदाय को जनजाति का दर्जा दिया.
  • इस क्षेत्र में शुद्ध पीने के पानी के अभाव में हमारी बहनों को कितनी समस्याओं का सामना करना पड़ता था, गंदे पानी के कारण कितनी बीमारियां छोटे छोटे बच्चों को होती थी. इन समस्याओं से निजात दिलाने के लिए तेजी से काम किया जा रहा है.
  • राजनीतिक स्वार्थ के लिए एनडीए के विरोध में खड़े लोगों के पास न तो तथ्य हैं और न ही उनके पास तर्क हैं. राष्ट्रहित और जनहित के लिए उठाए गए हर कदम का विरोध करना और नकारात्मकता फैलाना ही इनकी रणनीति है. आज पूरे देश के सहयोग से, जनभागीदारी से, अयोध्या में भव्य राममंदिर का निर्माण हो रहा है. लेकिन इस समय भी आपको उन लोगों को नहीं भूलना है, जो भगवान राम के अस्तित्व पर ही सवाल खड़े कर रहे थे, राम मंदिर निर्माण में अड़चनें खड़ी कर रहे थे. इन लोगों ने झूठ फैलाया कि एनडीए एससी/एसटी आरक्षण को खत्म कर देगी. लेकिन आपको मालूम है कि हमारी सरकार ने ही 10 वर्षों के लिए आरक्षण को आगे बढ़ाया है.
  • जब नागरिकता संशोधन कानून आया तो इन्होंने झूठ फैलाया कि बहुत सारे नागरिकों की नारिकता चली जाएगी. आज एक साल होने को है, लेकिन क्या किसी भी भारतीय की नागरिकता गई है? इन्होंने सिर्फ झूठ बोलकर, लोगों को डराकर ये लोग हमेशा अपने स्वार्थ की सिद्धि करते रहे हैं.
  • जब जम्मू कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाई गई तब भी इन्होंने यही कहा कि कश्मीर में आग लग जाएगी…खून की नदियां बह जाएंगी… न जाने क्या क्या बोला गया. आज जम्मू कश्मीर और लद्दाख शांति से विकास के नए पथ पर अग्रसर हैं. एक पक्ष है जंगलराज का जिसने बिहार की सड़कों को खस्ताहाल बना दिया.
  • दूसरा है एनडीए जिसने नए हाईवे, रेलवे, वाटरवे और एयरपोर्ट बनाकर बिहार की कनेक्टिविटी मजबूत की है. एक पक्ष है जंगलराज का जिसने गरीबों के पैसों से घोटाला किया, दूसरा है एनडीए जिसने गरीबों के अकाउंट में सीधे पैसे पहुंचाए हैं. एक पक्ष है जंगलराज का जो किसानों के नाम पर बिचौलियों के हित की राजनीति करता है, दूसरा है एनडीए जो किसानों के सम्मान और स्वाभिमान के काम करता है.
  • बिहार ने वो दिन भी देखे हैं जब रंगदारी की शिकायत करने के लिए, लोग किसी के पास जाते थे, तो उन्हें डबल रंगदारी देनी पड़ती थी. गाड़ी लूटी जाने की शिकायत करने के लिए लोग, जिसके पास अर्जी लेकर जाते थे, वो खुद लुटेरों के साथ घर में बैठा मिलता था.
  • लोग अपने घरों को सामने से सजाते नहीं थे, बड़े घर बनाते नहीं थे, अपने ही घर को सामने से पुराना करके रखते थे.उन्हें डर था, खौफ था. घर जितना अच्छा, किडनैपिंग उतनी जल्दी. घर जितना बड़ा, रंगदारी भी उतनी बड़ी. ये हाल कर दिया था इन लोगों ने बिहार का.
  • इन लोगों ने गरीब के दुख को कभी समझा ही नहीं. इन लोगों ने हमारे रेहड़ी, ठेले, पटरी पर काम करने वाले लाखों स्वाभिमानी छोटे व्यवसाइयों को भी अपने हाल पर छोड़ दिया था. अब देश के इतिहास में पहली बार इन छोटे व्यवसाइयों की सुध ली गई है, उनको बैंकों से, बैंकिंग सिस्टम से जोड़ा गया.

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